11/07/2026
Gheebah in Islam according to Quran and Hadith

ग़ीबत: एक गुनाह जो जन्नत से दूर कर सकता है | Geebat ek Gunah Jo Jannat Se dur kar sakta hai

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Geebat ek Gunah Jo Jannat Se dur kar sakta hai
Geebat ek Gunah Jo Jannat Se dur kar sakta hai

ग़ीबत

ग़ीबत गुनाहे कबीरा है। आज मुसलमान इसमें बहुत ज़्यादा मुब्तला हैं और औरतें तो खुसूसियत से इस में इमाम ही हैं, हालांकि कुरआन पाक में अल्लाह तआला ने इससे मना फरमाया हैः

तर्जुमा :- ऐ ईमान वालो! बहुत-से गुमानों से बचा करो, क्योंकि कुछ गुमान गुनाह होते हैं और सुराग मत लगाया करो और कोई किसी की ग़ीबत भी न किया करे। क्या तुम में से कोई इस बात को पसन्द करता है कि अपने मरे हुए भाई का गोश्त खाये। उसको तो तुम नागवार समझते हो और अल्लाह से डरते रहो। बेशक अल्लाह बड़ा तौबा कुबूल करने वाला, बड़ा मेहरबान है। (सूरः हुजरात, पारा 26, रूकू 14, आयत 12)

मुसलमानों को ग़ीबत से बचना चाहिए

मुसलमान औरतों को इस गुनाह से बचना चाहिए और अपनी मज्लिसों में अल्लाह व रसूल का तज़्किरा करना चाहिए।

आम औरतो की यह आदत बन गयी है कि जहाँ इकट्ठा हुई, एक दूसरे के ऐब बयान करने में लग गयीं और उनको इसका अंदाज़ा नहीं होता कि ये जहन्नम में जाने का सामान तैयार कर रही हैं।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“क्या तुम्हें इन अस्बाब का इल्म है, जिसकी वजह से लोग ज़्यादा से ज़्यादा जन्नत में जाएंगे? अल्लाह से तक्वा और अच्छे अख़लाक हैं। क्या तुम्हें उन अस्बाब का इल्म है, जिसकी वजह से लोग ज़्यादा से ज़्यादा जहन्नुम में जाएंगे? दो ख़ाली जगहें हैं, मुँह और शर्मगाह।”

ग़ीबत और बोहतान में फ़र्क

अगर इन औरतों को समझाया जाता है तो कहती हैं कि मैं कोई गलत बात थोड़े ही कह रही हूँ, यह ऐब तो इसमें है ही, हालांकि उनको यह भी इल्म नहीं कि ग़ीबत तो यही है कि जो ऐब हो, उसको उसके ग़ायबाना में बयान किया जाए और इसमें यह ऐब नहीं है, तो यह बोहतान है।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया :

“क्या तुम्हें मालूम है कि ग़ीबत क्या है?”

सहाबा ने अर्ज़ किया कि अल्लाह और रसूल को ज़्यादा इल्म है।

आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

“अपने भाई का तज़्किरा ऐसे तरीके से, जो उसे नापसन्द हो।”

सहाबा ने अर्ज़ किया कि अगर वह ऐब उसके अंदर हो, जब भी?

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:

“अगर वह ऐब है, जब ही तो ग़ीबत है। अगर वह ऐब नहीं है तो बोहतान है।”

अल्लाह तआला मुसलमान मर्द व औरत को ग़ीबत और तमाम गुनाहों से बचायें रखे।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया:

“जो आदमी अपनी ज़बान और अपनी शर्मगाह को गुनाहों से बचाये रखने की ज़िम्मेदारी ले ले, मैं उसके लिए जन्नत की ज़िम्मेदारी लेता हूँ।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ग़ीबत क्या है?

किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति में उसकी ऐसी बात कहना जो उसे नापसंद हो, ग़ीबत कहलाती है।

ग़ीबत और बोहतान में क्या फ़र्क है?

अगर कही गई बात उस व्यक्ति में वास्तव में मौजूद है तो वह ग़ीबत है, और अगर वह बात उसमें नहीं है तो वह बोहतान (झूठा आरोप) है।

ग़ीबत से कैसे बचें?

अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त करें, बेकार की मजलिसों से बचें, और अल्लाह से तौबा व इस्तिग़फ़ार करते रहें।

खूबसूरत वाक़िआ:आज ही अल्लाह से माफ़ी माँग लें | Aaj Hi Allah se mafi mang le.

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर….

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