एक बिच्छू के सफ़र का अजीब वाकिआ
इमाम राज़ी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि मशहूर बुजुर्ग और इल्मे कलाम के माहिर गुज़रे हैं। जिन्होंने “तफ़्सीरे कबीर” के नाम से कुरआन करीम की मशहूर तफ्सीर लिखी है। इस तफ्सीर में सिर्फ सूरः फातिहः की तफ्सीर दो सौ पेजों पर मुश्तमिल है, और तफ्सीर में सूरः फातिहः की पहली आयत “अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आ-लमीन” की तफ्सीर के तहत एक वाकिआ लिखा है कि मैंने एक बुजुर्ग से खुद उनका वाकिआ सुना, वह बगदाद में रहते थे।
वह बुजुर्ग फ़रमाते हैं कि मैं एक दिन शाम को सैर करने के लिए “दरिया-ए-दजला” के किनारे की तरफ चला गया, जब मैं दरिया-ए-दजला के किनारे किनारे चलने लगा तो मैंने देखा कि मेरे आगे एक बिच्छू चला जा रहा है, मेरे दिल में ख़्याल आया कि यह बिच्छू भी अल्लाह तआला की मख्लूक है, और ज़ाहिर है कि अल्लाह तआला ने इसको किसी न किसी हिक्मत और मस्लिहत के तहत ही पैदा किया है, अब इस वक़्त पता नहीं यह कहां से आ रहा है? कहां जा रहा है?
इसकी मन्ज़िल क्या है? वहां जाकर क्या करेगा। मेरे दिल में यह ख़्याल आया कि मेरे पास तो कुव्वत है, मैं सैर के लिए निकला हूं, आज मैं इस बिच्छू का पीछा करता हूं कि यह कहां जाता है, चुनांचे वह बिच्छू आगे आगे चलता रहा और मैं उसके पीछे पीछे चलता रहा, चलते चलते उसने दरिया की तरफ रुख़ किया और किनारे पर जाकर खड़ा हो गया, मैं भी क़रीब ही खड़ा हो गया।
थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि दरिया में एक कछुआ तैरता हुआ आ रहा है, वह कछुआ आकर किनारे लग गया और यह बिच्छू छलांग लगा कर उसकी पुश्त पर सवार हो गया। इस तरह अल्लाह तआला ने दरिया पार करने के लिए कश्ती भेज दी। चुनांचे वह कुछआ उसको अपनी पीठ पर सवार करके रवाना हो गया, चूंकि मैंने यह तय कर लिया था कि आज मैं यह देखूंगा कि बिच्छू कहां जा रहा है, इसलिये मैंने भी कश्ती किराए पर ली और उसके पीछे रवाना हो गया।
यहां तक कि उस कछुए ने दरिया पार कर लिया, और जाकर इसी तरह दूसरे किनारे जाकर लग गया और बिच्छू छलांग लगा कर उतर गया। अब बिच्छू आगे चला और मैंने उसका फिर पीछा करना शुरू कर दिया।
आगे मैंने देखा कि एक आदमी एक पेड़ के नीचे सो रहा है, मेरे दिल में ख़्याल आया कि शायद यह बिच्छू उस आदमी को काटने जा रहा है। मैंने सोचा कि जल्दी से उस आदमी को जगा दूं, ताकि वह शख़्स उस बिच्छू से बच जाए। लेकिन जब मैं उस आदमी के करीब गया तो मैंने देखा कि एक ज़हरीला सांप अपना फन उठाए उस आदमी के सर के पास खड़ा है, और करीब है कि वह सांप उसको डस ले, इतने में यह बिच्छू तेज़ी के साथ सांप के ऊपर सवार हो गया और उसको एक ऐसा डंक मारा कि वह सांप बल खाकर ज़मीन पर गिर पड़ा और तड़पने लगा,
फिर वह बिच्छू किसी और मन्ज़िल पर रवाना हो गया, अचानक उस वक़्त उस सोने वाले शख़्स की आंख खुल गयी और उसने देखा कि करीब से एक बिच्छू जा रहा है, उसने फौरन एक पत्थर उठा कर उस बिच्छू को मारने के लिए दौडा मैं क़रीब ही खड़ा होकर सारा मन्ज़र देख रहा था, इसलिये मैंने फौरन उसका हाथ पकड़ लिया। और उस से कहा कि तुम जिस बिच्छू को मारने जा रहे हो यह तुम्हार मुहसिन है, और इसने तुम्हारी जान बचाई है, हकीकत में यह सांप जो यहां मरा पड़ा है तुम पर हमला करने वाला था और क़रीब था कि डंक मार कर तुम्हें मौत के घाट उतार दे,
खूबसूरत वाक़िआ:अख़्लाक ही असली दौलत | Akhlak hi Asli Daulat.
लेकिन अल्लाह तआला ने बहुत दूर से इस बिच्छू को तुम्हारी जान बचाने के लिए भेजा है, और अब तुम इस बिच्छू को मारने की कोशिश कर रहे हो। वह बुजुर्ग फ़रमाते हैं कि मैंने उस दिन अल्लाह तआला के रब होने यह करिश्मा देखा कि किस तरह अल्लाह तआला उस बिच्छू को दरिया के दूसरे किनारे से उस शख़्स की जान बचाने के लिए यहां लाए। बहर हाल दुनिया में कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसके पैदा करने में कोई न कोई तक्वीनी हिक्मत और मस्लिहत न हो।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….
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