28/01/2026
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मां की गोद बच्चे का पहला मदरसा|Maa ki God bache ka pahla madarsa.

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Maa ki God bache ka pahla madarsa.
Maa ki God bache ka pahla madarsa.

इनसानी ज़िन्दगी की शुरूआत माँ के पेट से होती है। बच्चा माँ के पेट से पैदा होकर दुनिया में आता है। इसी लिए माँ की गोद को बच्चे का पहला मदरसा कहा जाता है। आईन्दा के एक-दो बयानात औरत की तालीम की ज़रूरत, औरत बच्चों की तरबियत किस तरह करे? इस उनवान पर रहेंगे।

उम्मीद है कि सब औरतें तवज्जोह से सुनेंगी। अहम बातों को लिखकर सुरक्षित रखेंगी और उन बातों को अमली जामा पहनायेंगी। ताकि उनसे उनको दीनी और दुनियावी सब फायदे हासिल हो सकें।

जब कोई मिस्त्री किसी दीवार की पहली ईंट ही टेढ़ी रख देता है तो वह दीवार आसमानों तक ऊँची चली जाये उसका टेढ़ापन बढ़ता ही चला जाता है।

बिल्कुल इसी तरह अगर माँ की अपनी ज़िन्दगी में दीनदारी नहीं और वह बच्चे की परवरिश कर रही है तो वह बच्चे में दीन की मुहब्बत कैसे पैदा कर पायेगी, इसलिए इस पहली ईंट को ठीक करने की ज़रूरत है। माँओं की गोद को दीनी गोद बनाने की ज़रूरत है।

आज बच्चियाँ अपनी उम्र की वजह से माँ बन जाती हैं लेकिन दीनी तालीम न होने की वजह से उनको यह पता नहीं होता कि मुझे क्या करना है। वो माँ के मकाम से वाक़िफ नहीं होतीं। माँ की ज़िम्मेदारियों से वाक़िफ नहीं होतीं।

बेचारी अपनी अक़्ल व समझ से जो बेहतर समझती हैं वही करती रहती हैं। कितना अच्छा होता कि उनको दीन की तालीम होती, कुरआन और हदीस के उलूम उनके सामने होते, अल्लाह वालों की ज़िन्दगियों के हालात उनको मालूम होते, कदम-कदम पर ये बच्चे को अच्छी हिदायात देतीं, नसीहतें करतीं, दुआयें देतीं। उनकी, मुहब्बत भरी बातें बच्चे की ज़िन्दगी में निखर कर सामने आ जातीं।

खूबसूरत वाक़िआ:-एक बाप की आँखों के आँसू |

अल्लाह से एक दिली दुआ…

ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।

प्यारे भाइयों और बहनों :-

अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।

क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे।
इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें।
अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह ख़ैर….

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