14/01/2026
Untitled design 20250917 034739 0000

सुप्रीम कोर्ट का वक़्फ़ बोर्ड पर बड़ा फैसला | Waqf Amendment Act 2025 पर रोक के मायने.

Share now
सुप्रीम कोर्ट का वक़्फ़ बोर्ड पर बड़ा फैसला | Waqf Amendment Act 2025 पर रोक के मायने
सुप्रीम कोर्ट का वक़्फ़ बोर्ड पर बड़ा फैसला | Waqf Amendment Act 2025 पर रोक के मायने

बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पूरा मामला, समर्थन और विरोध

भारत में वक़्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन हमेशा से एक संवेदनशील और जटिल विषय रहा है। हाल ही में संसद द्वारा पारित वक़्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 (Waqf Amendment Act 2025) को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई थी। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कुछ धाराओं पर अस्थायी रोक (Stay Order) लगा दी है। यह फैसला संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

वक़्फ़ क्या है और नया कानून क्यों बना?

वक़्फ़ इस्लाम में ऐसा धार्मिक या धर्मार्थ ट्रस्ट है, जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति मस्जिद, मदरसा, शिक्षा, स्वास्थ्य या जनकल्याण के लिए दान कर देता है। भारत में लाखों एकड़ जमीन और कई इमारतें वक़्फ़ संपत्तियों में आती हैं।

केंद्र सरकार ने 2025 में वक़्फ़ संशोधन अधिनियम पास किया, जिसका उद्देश्य था वक़्फ़ संपत्तियों पर अतिक्रमण रोकना, पंजीकरण प्रक्रिया को सख़्त करना, और प्रबंधन में पारदर्शिता लाना।

लेकिन इसके कुछ प्रावधान विवादित बन गए, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला — किन धाराओं पर लगी रोक?

15 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं—

1. पाँच साल इस्लाम अभ्यास की शर्त

नया कानून कहता था कि जो व्यक्ति कम से कम पाँच साल से इस्लाम धर्म का पालन कर रहा हो, वही संपत्ति वक़्फ़ कर सकता है।

अदालत ने इस पर रोक लगाई क्योंकि यह मनमाना और अस्पष्ट था।

2. कलेक्टर को विवाद सुलझाने का अधिकार

कानून में प्रावधान था कि जिला कलेक्टर तय कर सकेगा कि कौन-सी जमीन वक़्फ़ है और कौन नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह काम न्यायपालिका का है, प्रशासनिक अधिकारी का नहीं। इसलिए इस धारा पर रोक लगा दी गई।

3. गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या पर सीमा

अदालत ने तय किया कि सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल में 4 से अधिक और राज्य वक़्फ़ बोर्डों में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे।

फैसले के समर्थन में तर्क

संविधान की रक्षा: अदालत ने धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को प्राथमिकता दी।

न्यायपालिका की भूमिका मजबूत: ज़मीन विवाद जैसे मामलों का निर्णय अदालतें ही कर सकती हैं, न कि प्रशासनिक अधिकारी।

अल्पसंख्यक अधिकारों का सम्मान: यह फैसला दिखाता है कि कानून बनाने की प्रक्रिया में भी समुदाय की भावनाओं और अधिकारों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

फैसले के विरोध में तर्क

सुधार की रफ्तार धीमी: सरकार का इरादा वक़्फ़ संपत्तियों में पारदर्शिता लाना था, लेकिन रोक से सुधार की प्रक्रिया रुक गई।

विवाद सुलझाने में देरी: अगर सारे मामले अदालतों में जाएंगे तो मुकदमेबाज़ी और लंबी हो सकती है।

प्रशासनिक कठिनाई: पहले सोचा गया था कि कलेक्टर के पास अधिकार होंगे तो फैसले जल्दी होंगे, अब फिर से देरी की आशंका है।

राजनीतिक असर: कुछ लोग इस फैसले को धार्मिक या राजनीतिक मुद्दा बनाकर समाज में तनाव फैला सकते हैं।

आगे की चुनौतियाँ

राज्य सरकारों को स्पष्ट नियम बनाने होंगे, ताकि यह तय हो सके कि “इस्लाम अभ्यास” जैसी शर्त को किस तरह मापा जाए।

अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई तक असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है।

वक़्फ़ बोर्ड और प्रशासन को नए निर्देशों के अनुसार अपने कामकाज में बदलाव करना होगा।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न तो पूरे कानून को रद्द करता है और न ही सरकार की मंशा को नकारता है। यह केवल यह सुनिश्चित करता है कि संशोधन संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ न जाए।

इस फैसले से सरकार, वक़्फ़ बोर्ड और अल्पसंख्यक समुदाय सभी को एक संदेश मिला है— सुधार ज़रूरी हैं, लेकिन संवैधानिक दायरे में रहकर ही।

यह फैसला फिलहाल अस्थायी है। अंतिम सुनवाई के बाद ही तय होगा कि वक़्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 की कौन-सी धाराएँ स्थायी रहेंगी और कौन-सी पूरी तरह हट जाएँगी।

🤲 Support Sunnat-e-Islam

Agar aapko hamara Islamic content pasand aata hai aur aap is khidmat ko support karna chahte hain, to aap apni marzi se donation kar sakte hain.
Allah Ta‘ala aapko iska ajr ata farmaye. Aameen.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *