हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक ग़ज़वा से वापस तशरीफ लाए तो एक औरत ने हाज़िर होकर अर्ज़ किया या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैंने नज़र मानी थी कि आप मैदाने जिहाद से बखैरियत वापस तशरीफ लाएंगे तो मैं आप के सामने दफ़ बजाउँगी और गाऊँगी।
हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया अगर तुम ने नज़र मानी थी तो बजालो वर्ना नहीं उस औरत ने कहा हुजूर ! मैंने नज़र मानी थी और दफ़ बजाना शुरू कर दी इतने में हज़रत अबू बक्र सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु तशरीफ ले आये वह औरत दफ़ बजाती रही फिर हज़रत अली तशरीफ लाये वह औरत दफ़ बजाती रही फिर हज़रत उस्मान ग़नी तशरीफ लाए वह फिर भी बजाती रही फिर हज़रत उमर तशरीफ लाए तो उस औरत ने हज़रत उमर को देखते ही दफ़ को अपनी रानों के नीचे छुपा लिया और खुद दफं के ऊपर बैठ गई हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया, ऐ उमर ! मेरे बैठे हुए तो यह दफ़ बजाती रही लेकिन तुम को देख कर उसने दफ़ बजाना छोड़ दी। “इन्नश्शैतान युख़ाफु मिन्क या उमर” ऐ उमर शैतान तुम से डरता है। (मिश्कात शरीफ सः 55)
हज़रत उमर फारूक रजियल्लाहु अन्हु का यह रोअब व दबदबा है कि शैतान भी उनसे डरता है और अब भी वह हज़रत उमर का नाम सुन ले तो काँप उठते हैं दफ़ बजाने वाली औरत हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने दफ़ बजाती रही हज़रत अली आए तो भी बजाती रही, हज़रत उस्मान आए तो भी बजाती रही और जब हज़रत उमर आए तो डर गई और दफ़ का बजाना छोड़ कर दफ़ को छुपा दिया,
मुहद्दिसीन किराम ने यहाँ एक बड़ी ईमान अफरोज़ बात लिखी है फरमाते हैं कि अगर कोई यह कहे कि उस हदीस में तो हज़रत उमर को हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से भी बड़ा दिया गया है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की मौजूदगी में तो दफ़ बजाती रही और हज़रत उमर आए तो शैतान डर गया और दफ़ बजना बंद हो गई।
तो उसका जवाब यह है कि अगर कोई आदमी निहत्ता बैठा हो उसके हाथ में लकड़ी न हो तो कुत्ता बे ख़ौफ़ उस के पास बैठा रहेगा लेकिन जब वह आदमी अपनी लकड़ी मंगवा लेगा और उसकी लकड़ी ले आई जायेगी तो कुत्ता उस लकड़ी को देख कर एक दम भाग उठेगा तो क्या लकड़ी उस आदमी से बढ़ गई?
कि कुत्ता उस आदमी से तो न डरा और बैठा रहा लेकिन जब लकड़ी आती देखी तो भाग उठा? नहीं यह बात नहीं यह भी दर असल उस लकड़ी वाले ही का रोब है कुत्ते ने जब देखा कि आदमी निहत्ता है तो बैठा रहा और जब लकड़ी आगई तो डर गया कि अब यह आदमी निहत्ता नहीं रहा उसकी लकड़ी आगई अब मेरी खैर नहीं तो उस लकड़ी का सारा रोअब दर असल लकड़ी वाले का रोअब है।
इसी तरह हज़रत फारूक रजियल्लाहु अन्हु हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लकड़ी हैं जब तक उमर न आए शैतान बैठा रहा और जब उसने देखा कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की लकड़ी या सोंटा कह लीजीए, आगया तो शैतान भाग उठा, यह रोबे उमर भी अस्ल में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ही का रोब है और यह भी मलूम हुआ कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मुख़्तार हैं शरीअत के किसी हुक्म से जिसे चाहें मुस्तस्ना फरमादें आप को इख़्तियार है आप ने उस औरत को दफ़ बजाने की इजाज़त दे दी जब इजाज़त दे दी, तो उसके लिए जाएज़ हो गई !रात का चोर।
अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे, हमे एक और नेक बनाए, सिरते मुस्तक़ीम पर चलाये, हम तमाम को नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और इताअत की तौफीक़ आता फरमाए, खात्मा हमारा ईमान पर हो। जब तक हमे ज़िन्दा रखे इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखे, आमीन ।
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क्या पता अल्लाह ताला को हमारी ये अदा पसंद आ जाए और जन्नत में जाने वालों में शुमार कर दे। अल्लाह तआला हमें इल्म सीखने और उसे दूसरों तक पहुंचाने की तौफीक अता फरमाए । आमीन ।
खुदा हाफिज…
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