एक जानी नवजवान की तौबा
हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुम फ़रमाते हैं कि मैंने यह हदीस नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सात मर्तबा से भी ज़्यादा मर्तबा सुनी है।
आपने इरशाद फ़रमाया : बनी इसराईल की क़ौम में किफ़्ल नामी एक आदमी था जो गुनाहों के करने में बड़ा बेबाक था। एक मर्तबा एक औरत आई जो बहुत मजबूर थी। उसने उसको साठ दीनार इस शर्त पर दिए कि वह अपने साथ गुनाह करने दे। औरत राज़ी हो गई।
फिर जब वह उससे गुनाह करने लगा और उसके पास बैठ गया जैसा कि मर्द औरत के पास बैठता है तो औरत की चीख निकल गई और रोने लगी। उस जवान ने पूछा कि क्यों रोती हो, क्या मैंने तुम्हें इसके लिए मजबूर किया था?
उसने कहा नहीं, यह बात नहीं है बल्कि यह गुनाह ऐसा है कि जो मैंने आज तक नहीं किया लेकिन आज मैं मजबूरी की वजह से मजबूर हो गई। यह सुनकर वह नवजवान उससे हट गया और कहा चली जाओ और यह दीनार भी ले जाओ। फिर उस शख्स ने कहा अल्लाह की क़सम !Kya ek sacchi Tauba sare Gunah Mita sakti hai.
किफ़्ल भी आज के बाद यह गुनाह नहीं करेगा। फिर यह शख़्स उसी रात फ़ौत हो गया। सुबह हुई तो उसके घर के दरवाज़े पर लिखा हुआ था अल्लाह ने किफ़्ल की मगफ़िरत कर दी।Kya ek sacchi Tauba sare Gunah Mita sakti hai.
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अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
