ईशा की नमाज़ क्या है?
ईशा की नमाज़ इस्लाम की पाँच फ़र्ज़ नमाज़ों में से आख़िरी नमाज़ है। हर बालिग़ मुसलमान मर्द और औरत पर ईशा की नमाज़ अदा करना फ़र्ज़ है।
अगर कोई मुसलमान जानबूझकर बिना किसी शरई वजह के ईशा की नमाज़ छोड़ देता है, तो यह बहुत बड़ी लापरवाही है। इसलिए हमें हमेशा कोशिश करनी चाहिए कि ईशा की नमाज़ अपने वक़्त पर जमाअत के साथ अदा करें।
ईशा की नमाज का वक्त कब होता है?
ईशा की नमाज़ का वक़्त मगरिब का समय खत्म होने के बाद शुरू होता है और फ़ज्र का वक़्त शुरू होने तक रहता है। अलग-अलग शहरों और मौसम के हिसाब से इसमें थोड़ा फर्क हो सकता है।
इसलिए सही वक़्त जानने के लिए अपने शहर की मस्जिद के टाइम-टेबल या किसी भरोसेमंद इस्लामिक नमाज़ ऐप का इस्तेमाल करें।
ईशा की नमाज़ में कितनी रकअत होती हैं?
ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकअत होती हैं।
4 रकअत सुन्नत (ग़ैर मुअक्कदा)
4 रकअत फ़र्ज़
2 रकअत सुन्नत (मुअक्कदा)
2 रकअत नफ़्ल
3 रकअत वित्र वाजिब
2 रकअत नफ़्ल
जो लोग जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ते हैं, वे फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे अदा करते हैं।
ईशा की नमाज़ पढ़ने से पहले क्या करें?
नमाज़ शुरू करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
वुज़ू सही तरीके से करें।
कपड़े और जिस्म पाक हों।
नमाज़ की जगह साफ़ हो।
क़िब्ला (काबा शरीफ़) की तरफ़ रुख करें।
दिल में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए नमाज़ की नियत रखें।
4 रकअत सुन्नत की नियत
अगर आप ईशा की पहली चार रकअत सुन्नत पढ़ रहे हैं तो दिल में नियत करें: नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले।
और दुआये सना पढ़े जो ये हैं “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े।
उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और जो आपको याद हो। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे।
फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और वापिस सजदे में जाये। वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े।
आप फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये और हाथ बांध ले और फिर से अल्हम्दु शरीफ पढ़े और उसके बाद कोई दूसरी सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। उसके बाद फिर से अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाये।
रुकू में जाने के बाद वापिस 3 मर्तबा “सुबहाना रब्बी अल अज़ीम” पढ़े। इसके बाद वापिस आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और दोबारा रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर कहते हुए सजदे में जाये।
सजदे में वापिस 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े फिर वापिस अल्लाहु अकबर कहते हुए दोबारा सजदे में सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए बैठ जाये।
ध्यान रहे आप जब बैठे तो सीधे पैर के अंघूठे के बल पर पांचो अँगुलियों समेत बैठे। उल्टा पैर आप ज़मीन पर टिका सकते हैं। अगर कोई परेशानी आ रही हैं इस तरह बैठने में या अंगूठा हिल जाता है तो कोई मसला नहीं। लेकिन जानबूझकर अंगूठा हिलाना या दोनों पैर ज़मीन पर टिका कर बैठना गलत हैं।
ये भी पढ़ें: मगरिब की नमाज़ पढ़ने का तरीका।
फिर आप अत्तहिय्यात पढ़े। अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद आप फिर तीसरी रकाआत के लिए अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं फिर जैसे आपने ये 2 रकाआत पढ़ी उसी तरह आपको 4 सुन्नत की आखरी 2 और रकाआत पढ़नी हैं।
बस आखिर की 2 रकाआत में अत्तहिय्यात के बाद दरूदे इब्राहिम एक बार और दुआ ए मसुरा एक एक बार पढ़ना हैं। उसके बाद सलाम फेरना हैं। इस तरह आपकी ईशा की 4 रकात नमाज़ सुन्नत हो जाएगी।
4 रकात फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने का तरीका
जब 4 रकात सुन्नत पूरी हो जाए, तो उसके बाद 4 रकात फ़र्ज़ अदा की जाती है। अगर आप मस्जिद में जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ रहे हैं, तो इमाम की पैरवी करें। अगर घर पर पढ़ रहे हैं, तो नियत करके अकेले नमाज़ अदा करें।
नियत
“नियत की मैंने 4 रकात फ़र्ज़ नमाज़ ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहु अकबर।”
इसके बाद नियत बांधकर दुआये सना पढ़ें, फिर तअव्वुज़, तस्मिया, फिर सूरह फातिहा और उसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ें।
फिर रुकू करें और “सुब्हाना रब्बियाल अज़ीम” कम से कम 3 बार पढ़ें।
रुकू से उठकर “समीअल्लाहु लिमन हमिदह” और “रब्बना लक़ल हम्द” पढ़ें।
दो सजदे करें और हर सजदे में “सुब्हाना रब्बियाल आला” कम से कम 3 बार पढ़ें।
दूसरी रकात भी इसी तरह पूरी करें। दूसरी रकात के बाद बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ें और फिर तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएँ। तीसरी और चौथी रकाआत फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकात में केवल सूरह फातिहा पढ़ी जाती है।
उसके बाद सीधे रुकू किया जाता है। चौथी रकात के आख़िर में बैठकर: अत्तहिय्यात फिर दुरूद-ए-इब्राहीम उस के बाद दुआ-ए-मसूरा पढ़ें और फिर दाएँ व बाएँ सलाम फेर दें। इस तरह 4 रकात फ़र्ज़ नमाज़ पूरी हो जाती है।
2 रकात सुन्नत नमाज़ का तरीका
फ़र्ज़ नमाज़ के बाद 2 रकात सुन्नत पढ़ी जाती है।
नियत “नियत की मैंने 2 रकाआत नमाज़ सुन्नत, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर
इस नमाज़ का तरीका वही है जो आम 2 रकात नमाज़ का होता है।
पहली रकात में: सना तअव्वुज़ तस्मिया सूरह फातिहा
कोई दूसरी सूरह फिर रुकू और सजदे पूरे करें।
दूसरी रकात में भी यही तरीका अपनाएँ। आखिर में अत्तहिय्यात, दुरूद-ए-इब्राहीम और दुआ-ए-मसूरा पढ़कर सलाम फेर दें।
इस तरह 2 रकात सुन्नत पूरी हो जाएगी।
2 रकात नमाज़ नफ़्ल का तरीका
जैसे आपने 2 रकात नमाज़ सुन्नत पढ़ी बस ऐसे ही 2 रकात नमाज़ नफ़्ल पढ़नी हैं। बस नियत में आपको 2 रकात नमाज़ नफ़्ल बोलना हैं। इस तरह आपकी नफ़्ल नमाज़ भी हो जाएगी।
वित्र की नमाज़ की नियत
नियत की मैंने 3 रकात नमाज़ वित्र वाजिब की वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुए अपने दोनों हाथ उठा कर अपने कानों तक ले जाये फिर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे बांध ले।
ये भी पढ़ें: असर की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा।
उसके बाद सना पढ़े जो इस तरह हैं “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबा रकस्मुका व तआला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका” इसके बाद आप अउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़े।
उसके बाद सूरह फातेहा पढ़े। सूरह फातेहा पढ़ने के बाद कोई एक सूरह पढ़े जैसे कुल्हुवल्लाह, या कुल अऊजु बिरब्बिल फलक या कोई और सूरह जो आपको याद हो। सूरह पढ़ने के बाद आप अल्लाहो अकबर कहते हुए रुकू में जाये रुकू में जाने के बाद 3 मर्तबा “सुबहान रब्बी अल अज़ीम” पढ़े।
इस वक़्त आपको अपनी नज़र अपने पैर के अंगूठे पर रखनी हैं। इसके बाद आप “समीअल्लाहु लिमन हमीदह” कहते हुए रुकू से खड़े हो जाये और रब्बना व लकल हम्द कहते हुए उसके बाद अल्लाहो अकबर बोलते हुए सजदे में जाये। सजदे में इस तरह जाये की आपका सीधा घुटना पहले ज़मीन पर लगे। फिर सजदे में 3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़े। 3 बार सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे।
दूसरी रकात भी इस तरह पढ़े इसमें आपको सजदे में जाने के बाद 3-3 मर्तबा सुबहाना रब्बी अल आला पढ़ने के बाद बैठ जाना हैं और अत्तहिय्यात पढ़ना हैं अत्तहिय्यात पढ़ने के दौरान आपको अशहदु अल्लाह अल्फ़ाज़ आते ही शहादत की ऊँगली को उठाना हैं। फिर आप अल्लाहो अकबर बोलते हुए तीसरी रकात के लिए फिर से खड़े हो जाये।
तीसरी रकात में बिस्मिल्लाहीर्रहमानिररहीम पढ़ कर आपको सूरह फातेहा के बाद कोई भी सूरह पढ़ना है। उसके बाद रुकू में न जाकर आपको अल्लाहो अकबर कहते हुए हाथ उठा कर वापिस हाथ बांधना हैं। फिर दुआ ए कुनूत पढ़ना है। उसके बाद वही रुकू में जाकर बाकि की नमाज़ की प्रक्रिया पूरी करे जैसा हमने पहले की 2 रकात में बताया हैं इस तरह आपको वित्र की नमाज़ भी हो जाएगी।
आखिर में 2 रकात नफ़्ल नमाज़
वित्र वाजिब नमाज़ पूरी करने के बाद चाहें तो 2 रकात नफ़्ल भी अदा कर सकते हैं। यह नफ़्ल नमाज़ सवाब का ज़रिया है।
नियत
नियत की मैंने 2 रकाआत नमाज़ नफ्ल, वास्ते अल्लाह तआला के वक़्त ईशा का, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ और फिर आप अल्लाहु अकबर इसका तरीका वही है जो आम 2 रकात नमाज़ का होता है।
पहली और दूसरी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई भी सूरह पढ़ें, फिर रुकू और सजदे पूरे करें। दूसरी रकात के आखिर में अत्तहिय्यात, दुरूद शरीफ़ और दुआ-ए-मसूरा पढ़कर सलाम फेर दें।
ईशा की नमाज़ से जुड़ी अहम बातें
कोशिश करें कि ईशा की नमाज़ अपने शुरुआती वक़्त में अदा करें।
अगर मस्जिद में जमाअत मिले तो जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ें।
वित्र नमाज़ को हल्के में न लें, हनफ़ी फ़िक़्ह के हिसाब से यह वाजिब है।
नमाज़ में जल्दबाज़ी न करें और हर रुक्न इत्मीनान से अदा करें।
अगर किसी मसअले में शंका हो तो अपने इलाके के किसी भी आलिम से पूछ लें।
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ईशा की नमाज़ के फ़ायदे
पूरे दिन की इबादत मुकम्मल होती है।
अल्लाह तआला की रहमत और मग़फ़िरत की उम्मीद बढ़ती है।
जमाअत से नमाज़ पढ़ने का सवाब कई गुना मिलता है।
दिल को सुकून और रूहानी ताक़त हासिल होती है।
नमाज़ इंसान को गुनाहों से बचने की प्रेरणा देती है।
इस से हमें क्या सीख मिली
ईशा की नमाज़ हर मुसलमान के लिए बेहद अहम इबादत है। हमें चाहिए कि इसे सही तरीके, सही वक़्त और पूरी तवज्जोह के साथ अदा करें। अगर किसी दुआ, सूरह या नमाज़ के किसी हिस्से में कमी हो तो उसे सीखने की कोशिश करें और धीरे-धीरे अपनी नमाज़ को बेहतर बनाएं।
अल्लाह तआला हम सबको पाँचों वक्त की नमाज़ पाबंदी के साथ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ईशा की नमाज़ में कुल कितनी रकअत होती हैं?
हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार कुल 17 रकअत होती हैं।
2. क्या ईशा की फ़र्ज़ नमाज़ अकेले पढ़ सकते हैं?
हाँ, अगर जमाअत न मिले तो अकेले भी पढ़ सकते हैं।
3. वित्र नमाज़ का क्या हुक्म है?
हनफ़ी फ़िक़्ह में वित्र नमाज़ वाजिब है।
4. क्या ईशा की नमाज़ देर रात तक पढ़ सकते हैं?
हाँ, फ़ज्र का वक़्त शुरू होने से पहले तक ईशा की नमाज़ अदा की जा सकती है। बेहतर है कि बिना वजह देर न की जाए।
5. अगर कोई रकअत छूट जाए तो क्या करें?
अगर जमाअत में रकअत छूट जाए तो इमाम के सलाम फेरने के बाद अपनी छूटी हुई रकअत पूरी करें।
अल्लाह से एक दिली दुआ…
ऐ अल्लाह! तू हमें सिर्फ सुनने और कहने वालों में से नहीं, अमल करने वालों में शामिल कर, हमें नेक बना, सिरातुल मुस्तक़ीम पर चलने की तौफीक़ अता फरमा, हम सबको हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत और पूरी इताअत नसीब फरमा। हमारा खात्मा ईमान पर हो। जब तक हमें ज़िंदा रखें, इस्लाम और ईमान पर ज़िंदा रखें, आमीन या रब्बल आलमीन।
प्यारे भाइयों और बहनों :-
अगर ये बयान आपके दिल को छू गए हों, तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों तक ज़रूर पहुंचाएं। शायद इसी वजह से किसी की ज़िन्दगी बदल जाए, और आपके लिए सदक़ा-ए-जारिया बन जाए।
क्या पता अल्लाह तआला को आपकी यही अदा पसंद आ जाए और वो हमें जन्नत में दाखिल कर दे। इल्म को सीखना और फैलाना, दोनों अल्लाह को बहुत पसंद हैं। चलो मिलकर इस नेक काम में हिस्सा लें। अल्लाह तआला हम सबको तौफीक़ दे – आमीन।
जज़ाकल्लाह खैर….
